O.P. Jindal Global University में सैन्य कर्मचारियों के लिए विशेष छूट

सोनीपत, भारत, March 8, 2018 /PRNewswire/ --

  • JGU द्वारा शहीदों की विधवाओं के बच्चों और सेवारत सैन्य कर्मचारियों हेतु शैक्षिक कार्यक्रमों में विशेष छूटों की घोषणा
  • चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ, जनरल Bipin Rawat द्वारा विशिष्‍ट सार्वजनिक व्‍याख्‍यान
  • सेवानिवृत्ति के पश्चात सैन्य अधिकारियों के लिए द्वितीय कॅरियर के अवसर

राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुये O.P. Jindal Global University (JGU) ने शहीदों की विधवाओं के बच्चों और सेवारत सैन्य कर्मचारियों के लिए विशेष छूटों की घोषणा की है।

     (Photo: https://mma.prnewswire.com/media/650402/General_Bipin_Rawat.jpg )

यह घोषणा चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ जनरल Bipin Rawat द्वारा 5 मार्च को सोनीपत में JGU परिसर में 'राष्ट्र निर्माण में भारतीय सेना की भूमिका' विषय पर एक विशिष्‍ट सार्वजनिक व्‍याख्‍यान देते हुये की गई।

शहीदों की विधवाओं के किसी एक बच्चे को ट्‌यूशन फीस में 100% की छूट दी जायेगी, जबकि दो बच्चों को 75% की और 11 बच्चों को ट्‌यूशन फीस में 50% की छूट दी जाएगी। सेवारत सैन्य कर्मचारियों के मामले में, उन्हें एक या दो साल की अवधि के दीर्घकालीन अकादमिक कार्यक्रमों के लिए फीस में 50% की छूट दी जाएगी। Jindal Institute of Behavioural Sciences भी सैन्य स्कूल के शिक्षकों के लिए नि:शुल्‍क विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगा।

इस अवसर पर बोलते हुए जनरल Rawat ने सशस्त्र बलों के कर्मचारियों को नवीनतम तकनीकी विकासों से परिचित रखने की आवश्यकता पर बल दिया जिससे उन्‍हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य आधुनिक विकासों के साथ आने वाली भावी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सैन्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद दूसरा कॅरियर शुरु करने के लिये तैयार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों के महत्त्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में छात्रों को सम्बोधित करते हुए जनरल Rawat ने कहा, "हम (भारतीय सेना) अलग-थलग नहीं रह सकते। अपने ज्ञान का स्तर बढ़ाने के लिए हमारे लोगों को विश्वविद्यालयों से संपर्क शुरू करना होगा। हमने विचारों के आदान-प्रदान और अवसरों के विकास के लिए हमारे कुछ अधिकारियों को विश्वविद्यालयों में भेजना प्रस्तावित किया है। हर साल, 45 से 55 वर्ष की आयु के हमारे 1,000 से अधिक अधिकारी, पदोन्‍नति के लिए चयनित न होने पर सेवानिवृत्त हो जाते हैं। वे अनुभवी, प्रतिभावान, और व्यावहारिक ज्ञान से लैस होते हैं। लेकिन उनके पास डिग्री नहीं होती। इसी प्रकार, हमारे 50,000 सैनिकों को भी सेना छोड़ने के बाद अपना दूसरा करिअॅर शुरु करने में यही कठिनाई आती है। तो हम यही चाह रहे थे।''

फिर जनरल Rawat ने इंगित किया कि रूचि रखने वाले सैन्य कर्मचारी, यूनिवर्सिटी में अल्पकालीन और दीर्घकालीन अकादमिक कार्यक्रमों और प्रशिक्षण कार्यशालाओं में नामांकन कराकर भाग ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि, "सशस्त्र बलों में अधिकारियों के रूप में हम प्रतिष्ठित Jawaharlal Nehru University से डिग्री प्राप्त करते हैं। किन्तु हमें अपने कॅरियर में कभी भी इस विश्वविद्यालय में जाने का अवसर नहीं मिला। हमारे सैनिक, विश्वविद्यालयों में आधुनिक कौशल आधारित शिक्षा पा सकते हैं और इससे हमें अपने सशस्त्र बलों को वर्तमान ज़रूरतों के अनुसार विकसित करने में मदद मिलेगी।"

जनरल महोदय ने यह भी बताया कि भारत में सशस्त्र बल न केवल संघर्षों को संबोधित करते हैं बल्कि राष्ट्र की वृद्धि में भी योगदान करते हैं। "भारतीय सशस्त्र बल न केवल सीमाएं सुरक्षित रखते हैं बल्कि निवेशकों हेतु FDI जैसे निवेशों के लिये अनुकूल माहौल बनाने में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा संबंधी योगदान भी करते हैं। इस विश्वास के साथ कि भारतीय सशस्त्र बल सीमाओं की सुरक्षा करने में सक्षम हैं, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को आश्वस्ति मिलती है। मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि सशस्त्र बलों को जो भी बजट दिया जाता है, उसका बड़ा भाग देश में सबसे दूरदराज के इलाकों में ढांचागत सुविधाएं, सड़कें, स्कूल और अस्पताल आदि के विकास में उपयोग किया जाता है।"

भारतीय सेना को 'मानवीय' सेना बताते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि इसने आंतकवाद से जुड़ी चुनौतियों का पेशेवर तरीके से प्रभावी समाधान किया है।

उन्होंने विद्यार्थियों का आह्‌वान किया कि वे अपने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करें और कहा कि वे राष्ट्र का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि, "आपकी सोच और आपके कार्य का तरीका, हमारे देश का भविष्य तय करेगा। आप विद्यार्थी लोग ही देश का नेतृत्व करेंगे।"

जनरल Bipin Rawat का अभिनन्‍दन करते हुए प्रो (डॉ.) C. Raj Kumar, संस्थापक वाइस चांसलर, JGU ने इनके दौरे को एक ऐतिहासिक क्षण बताया, क्‍योंकि यह किसी सेवारत आर्मी जनरल द्वारा विश्वविद्यालय परिसर का पहला दौरा था। उन्होंने राष्ट्र की सेवा में सशस्त्र बलों के 'असाधारण योगदान' की सराहना की। उन्होंने शहीदों की विधवाओं और सेवारत सैन्य कर्मचारियों के लिए विशेष फीस पैकेजों की भी घोषणा की।

लोकसेवा की प्रेरणा बरकरार रखने की JGU की कटिबद्धता रेखांकित करते हुए प्रो. (डॉ.) C. Raj Kumar ने कहा, "समाज के विकास में, तथा भावी भारत के पेशेवरों को भारत व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले तीव्र भौगोलिक-राजनैतिक परिवर्तनों के लिए तैयार करने में विश्वविद्यालय विशेष भूमिका निभाते हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए JGU की प्रतिबद्धता, हमारे संस्थापक मिशन में निहित है और विश्वविद्यालय परिसर में सशस्त्र बल कर्मचारियों तथा उनके पाल्यों/बच्चों को विविध प्रकार की सेवाएं प्रदान करने के लिए हमें प्रेरित करती है। JGU और भारतीय सेना के बीच इस साझेदारी से उत्पन्न होने वाले अवसरों को लेकर हम अत्यधिक हर्षित और आशावान हैं जो न केवल दो संस्थानों के बीच बल्कि व्यापक भारतीय सशस्त्र बल समुदाय से संबंध मजबूत बनाएगी। चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ जन. Bipin Rawat के नजरिए, और इस प्रोजेक्ट को उनके समर्थन, तथा आज JGU परिसर में आने के लिए उनके द्वारा अपना बहुमूल्य समय निकालने, और हमारे विद्यार्थियों को हमारे देश के भावी लीडर्स बनने के लिए प्रेरित करने के लिए हम उनके प्रति हार्दिक आभारी हैं।"

अपने उद्‌घाटन सम्बोधन में लेफ्टिनेंट जनरल Rajesh Kochhar (सेवानिवृत्त), सीनियर डॉयरेक्टर, Jindal Institute of Leadership Development and Executive Education (JILDEE) और चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर JGU ने सशस्त्र बलों के नागरिक समाज को योगदान और इस प्रकार राष्‍ट्र निर्माण में योगदान के विषय में बात की।

सशस्त्र बलों से JGU की साझेदारी 2009 में आरंभ हुई। JILDEE में भारतीय सेना के लिए विशेष रूप से अनेक प्रशिक्षण और क्षमता सृजन कार्यक्रम चलाए गए हैं। भारतीय सेना के अधिकारियों को तीन सप्ताह का मॅन्‍डरिन चीनी भाषा का कोर्स जन्‍मजात यही बोली बोलने वालों द्वारा कराया जाना इसका एक प्रमुख उदाहरण है।

सार्वजनिक व्‍याख्‍यान के बाद जनरल Bipin Rawat ने 'आर्मी-सिविल सोसाइटी इंटरफेस' विषय पर एक राउंड टेबल चर्चा में भाग लिया जिसे Jindal School of International Affairs (JSIA), Jindal Global Law School (JGLS) और Jindal School of Government and Public Policy (JSGPP) द्वारा आयोजित किया गया था। प्रतिभागियों ने उन संकटपूर्ण सीमाओं तथा चुनौतियों पर चर्चा की, जिनमें भारतीय सेना और नागरिक समाज देश के विविधतापूर्ण परितंत्र के भीतर मिलकर कार्य करते हैं।

O.P. Jindal Global University के बारे में: 

O.P. Jindal Global University (JGU) हरियाणा सरकार द्वारा स्थापित और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा मान्यताप्राप्त एक अलाभकारी ग्लोबल यूनिवर्सिटी है। JGU को इसके संस्थापक चांसलर Mr. Naveen Jindal द्वारा अपने पिता स्व0, Mr. O.P. Jindal की स्मृति में एक मानवतावादी प्रयास के रूप में स्थापित किया गया। JGU को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा सर्वोच्च रेटिंग ग्रेड 'A' प्रदान किया गया है।  JGU एशिया की ऐसी चुनिंदा यूनिवर्सिटी में से एक है जिन्होंने 1:13 फैकल्टी-छात्र अनुपात बनाए रखा है और भारत तथा विश्व के विभिन्न भागों से असाधारण शैक्षणिक योग्यताओं और अनुभवों वाले फैकल्टी सदस्यों को नियुक्त किया है। JGU एक शोध केंद्रित यूनिवर्सिटी है, जो अंतर्विषयी और नवप्रवर्तक शिक्षणविधि, बहुलतावाद और अध्यवसायी अध्येतावृत्ति, और वैश्विक सोच तथा अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता के अपने मूलभूत संस्थागत मूल्यों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 

JGU ने आठ स्कूल स्थापित किए हैं: Jindal Global Law School (JGLS), Jindal Global Business School (JGBS), Jindal School of International Affairs (JSIA), Jindal School of Government and Public Policy (JSGP), Jindal School of Liberal Arts & Humanities (JSLH), Jindal School of Journalism & Communication (JSJC), Jindal School of Art & Architecture (JSAA) और Jindal School of Banking & Finance (JSBF).

मीडिया संपर्क:
Devadeep Konwar
dkonwar@jgu.edu.in
+91-7027850344
Assistant Director
Communication & Public Affairs
O.P. Jindal Global University

SOURCE O.P. Jindal Global University



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