शरणार्थियों और आप्रवासियों के लिए न्यायः Jindal Global University ने UN सिम्पोजियम में आवाज़ उठाई

सोनीपत, भारत और वियना, May 21, 2018 /PRNewswire/ --

"सामाजिक स्वीकृतिः शरणार्थियों और आप्रवासियों के समावेशीकरण की दिशा में शुरुआती कदम है।" - Dr. S.P. Sahni  

O.P. Jindal Global University (JGU) को वियना में 14-18 मई, 2018 के दौरान आयोजित 'आप्रवासन और वैश्विक अपराधों के दौर में शरणार्थियों और आप्रवासियों के बारे में दृष्टिकोण' विषय पर आमंत्रित चर्चा में भाग लेने का अद्वितीय सम्मान प्राप्त हुआ।

यह उल्लेखनीय है कि इस वैश्विक प्लेटफार्म पर प्रस्तुति हेतु आमंत्रित JGU एकमात्र भारतीय यूनिवर्सिटी रही। इस कार्यक्रम को United Nations Office on Drugs and Crime (UNODC) के तत्वाधान में आयोजित किया गया।

प्रो. (डॉ.) Sanjeev P. Sahni, प्रिंसिपल डायरेक्टर, Jindal Institute of Behavioural Sciences (JIBS), JGU ने इस फोरम में 'शरणार्थियों और आप्रवासियों हेतु न्याय के लिए जागरूकताः एक वैश्विक दक्षिणी दृष्टिकोण' पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

अपने प्रस्तुतिकरण में Prof. (Dr.) Sahni ने जोर देकर कहा कि 'सामाजिक स्वीकृति' शरणार्थियों और आप्रवासियों के समावेशन की दिशा में एक प्रमुख शुरुआती कदम बन गया है। "यह समावेशन, कई समूहों की जिम्मेदारी है जिनमें मेजबान सरकार, गैर-सरकारी संगठन, समुदाय, और स्थानीय निवासी शामिल हैं।" उन्होंने एक जागरूकतापूर्ण माहौल बनाने पर बात की, जहां स्थानीय नागरिकों में आप्रवासियों के लिए सदभावपूर्ण सामाजिक स्वीकार्यता की भावना प्रेरित करनी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि, "सरकारी स्तर पर, ऐसी मजबूत नीति तैयार किए जाने की ज़रूरत है जिसमें आप्रवास नीतियों को ध्यान में रखा जा सके, विविधता को स्वीकृति देने वाली समावेशी नीतियों को प्रोत्साहन दिया जाए, राष्ट्रीय वास्तविकताएं उपलब्ध कराई जाएं, स्थानीय संदर्भों को मान्यता दी जाए, निवास के लिए स्वस्थ भौतिक दशाएं उपलब्ध कराई जाएं, गैर-सरकारी संगठनों तथा प्राधिकृत प्रतिनिधियों को उपयुक्त रूप से शामिल किया जाएं; सामुदायिक स्तर पर गैर-सरकारी संगठनों को सामाजिक स्वीकृति को प्रोत्साहन देना होगा, आप्रवासियों को नौकरियों की खोज हेतु गतिशील करना होगा, देशों के सांस्कृतिक संदर्भों तथा भाषा से परिचित कराना होगा, आप्रवासियों के बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित कराना होगा, और व्यक्तिगत स्तर पर, मेजबान देश के प्रत्येक नागरिक को आप्रवासियों के प्रति संवेदनशील बनना होगा।"

आप्रवास किसी देश विशेष में नहीं होता। यह पूरी दुनिया में होता है, जहां भी मनुष्य है, वहां यह निरंतर घटित होता है; यह हमारे दौर की सच्चाई है। इससे आजीविका, देश की जनांकिकी, और अवसंरचना पर भार पड़ता है।

दुनिया भर में लगभग 65.6 मिलियन लोग विस्थापित होने के लिए विवश हैं, जिनमें से 16.1 मिलियन शरणार्थी UNHRC और 5.2 मिलियन UNRWA में रजिस्टर्ड हैं और उनमें से अनेक, 18 वर्ष से कम आयु के हैं। लगभग 10 मिलियन राज्यहीन लोग हैं, जो राष्ट्रीय पहचान तथा बुनियादी अधिकारों जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्यसेवा, रोजगार, तथा आवाजाही की स्वतंत्रता तक पहुंच से वंचित हैं। (UNHRC, 19 जून 2017)।

दुनिया मानवता के एक बड़े संकट से गुजर रही है। हर मिनट, दुनिया भर में 24 लोग अपना घर छोड़कर पलायन करने को मज़बूर होते हैं। इस तरह से रोजाना 34,000 लोग अपनी सुरक्षा, तथा बेहतर भविष्य की तलाश में अपना सर्वस्व पीछे छोड़ देते हैं (http://www.care.org).

विस्थापित लोगों के पुनर्वास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मानसिक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए Dr. Sahni ने अपना मत व्यक्त किया कि, "इस दिशा में हमें एकीकृत और अखंड तरीका अपनाना होगा। शरणार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य, जैव-मनो-सामाजिक कारकों से संचालित जटिलताओं पर निर्भर है, जिनमें व्यापक पैमाने पर सरकार तथा अन्य एजेंसियों द्वारा भूमिका निभाई जाती है।"

ऐसा माना जाता है कि आप्रवास, शरणार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जो जैविक कारकों (शारीरिक स्वास्थ्य), मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य, तथा मेजबान देश के लोगों द्वारा सामाजिक स्वीकृति पर निर्भर होता है।

शरण लेना एक मानवाधिकार है, और कोई मनुष्य अवैध नहीं है; मानवता के इस गहराते संकट के दौर में सभी प्रकार के जातीय भय/घृणा और जातीय भेदभाव का सामना करने के लिए ऐसी ही दृढ़ धारणाओं की आवश्यकता है।

इस 5-दिवसीय कार्यक्रम में शरणार्थी संकट के प्रमुख वैश्विक विशेषज्ञों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यसेवा प्रदाताओं, तथा प्रख्यात कानूनविदों आदि की भागीदारी रही।

JIBS के बारे में

Jindal Institute of Behavioural Sciences (JIBS), O.P. Jindal Global University का एक मूल्य आधारित शोध संस्थान है जो सामाजिक विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, सक्षमता मापन, तंत्रिका विज्ञान, तंत्रिकीय निर्णय विज्ञान, बोधात्मक विज्ञान, मनोजैविक प्रबंधन विज्ञान, फोरेंसिंक विज्ञान, सामाजिक मनोविज्ञान, आपराधिक व्यवहार आदि व्यापक क्षेत्रों पर फोकस करते हुए सैद्धांतिक और व्यावहारिक व्यवहारगत विज्ञान से संबंधित सतत प्रयोग, शोध व शिक्षण के माध्यम से मानव प्रक्रम सक्षमताएं समझने, विकसित करने व प्रयुक्त करने के प्रति समर्पित है।

एशिया में नवप्रवर्तन, शिक्षा, शोध, स्कॉलरशिप, तथा क्लीनिकल देखभाल में सर्वोत्तम व्यावहारिक तथा नवप्रवर्तक सामाजिक विज्ञान प्रविधियां विकसित व प्रयुक्त करने वाला संस्थान स्थापित करने के ध्येय के साथ JIBS बहुवैषयिक, मात्रात्मक, तथा वैज्ञानिक प्रकृति के शोध को प्रेरित करता है।

O.P. Jindal Global University के बारे में 

O.P. Jindal Global University (JGU) हरियाणा सरकार द्वारा स्थापित और University Grants Commission (UGC) द्वारा मान्यताप्राप्त एक अलाभकारी ग्लोबल यूनिवर्सिटी है। JGU को इसके संस्थापक चांसलर Mr. Naveen Jindal द्वारा उनके पिता स्व., Mr. O.P. Jindal की स्मृति में एक मानवतावादी प्रयास के रूप में स्थापित किया गया। JGU को National Accreditation & Assessment Council (NAAC) द्वारा सर्वोच्च रेटिंग ग्रेड 'A' प्रदान किया गया है।  

JGU एशिया की ऐसी चुनिंदा यूनिवर्सिटी में से एक है जिन्होंने 1:13 फैकल्टी-छात्र अनुपात बनाए रखा है और भारत तथा विश्व के विभिन्न भागों से असाधारण शैक्षणिक योग्यताओं और अनुभवों वाले फैकल्टी सदस्यों को नियुक्त किया है। JGU एक शोध केंद्रित यूनिवर्सिटी है, जो अंतरअनुशासन और नवप्रवर्तक शिक्षणविधि; बहुलतावाद और अध्यवसायी अध्येतावृत्ति; और वैश्विक सोच तथा अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता के अपने मूलभूत संस्थागत मूल्यों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 

JGU ने आठ स्कूल स्थापित किए हैं: Jindal Global Law School (JGLS), Jindal Global Business School (JGBS), Jindal School of International Affairs (JSIA), Jindal School of Government and Public Policy (JSGP), Jindal School of Liberal Arts & Humanities (JSLH), Jindal School of Journalism & Communication (JSJC), Jindal School of Art & Architecture (JSAA) और Jindal School of Banking & Finance (JSBF). 

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें - http://www.jgu.edu.in/.

मीडिया संपर्क:
Devadeep Konwar
dkonwar@jgu.edu.in
+91-7027850344
Director, Communications & Public Affairs
O.P. Jindal Global University


SOURCE O.P. Jindal Global University



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